Tesla India Factory: Tesla ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की अपनी बहुचर्चित योजना को आखिरकार बंद कर दिया है। पिछले कई सालों से कंपनी और भारत सरकार के बीच इम्पोर्ट ड्यूटी, लोकल प्रोडक्शन और निवेश को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन अब यह प्रोजेक्ट आधिकारिक तौर पर आगे नहीं बढ़ेगा। इससे भारत को मिलने वाला एक बड़ा विदेशी EV निवेश फिलहाल हाथ से निकल गया है।
Tesla की भारत एंट्री को लेकर चर्चा सबसे पहले 2021 के आसपास तेज हुई थी। उस समय कंपनी भारत में अपनी कारें लाना चाहती थी, लेकिन उसकी मांग थी कि इलेक्ट्रिक कारों पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी कम की जाए। उस वक्त भारत में इम्पोर्टेड EVs पर टैक्स 100% तक था। सरकार का कहना था कि बिना लोकल मैन्युफैक्चरिंग कमिटमेंट के ड्यूटी में राहत नहीं दी जाएगी।
कई राज्यों के नाम आए, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं उतरा
बीते कुछ वर्षों में Tesla India Factory को लेकर महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के नाम सामने आए। अलग-अलग चरणों में भारी निवेश की चर्चाएं भी हुईं, लेकिन किसी भी लोकेशन पर प्रोजेक्ट फाइनल नहीं हो पाया।
इसके बाद भारत सरकार ने EV कंपनियों के लिए नई नीति पेश की, जिसमें लोकल असेंबली का वादा करने वाली कंपनियों को कम इम्पोर्ट ड्यूटी का फायदा दिया गया। इसी दौरान Tesla ने भारत में अपने शोरूम खोलने की दिशा में कदम बढ़ाए। मुंबई और दिल्ली में रिटेल मौजूदगी शुरू हुई, पुणे में सर्विस सेंटर आया और Model Y कंपनी की पहली आधिकारिक कार बनी।
हालांकि फैक्ट्री लगाने को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई और अब कंपनी ने इस योजना को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
Tesla की वैश्विक स्थिति भी बनी बड़ी वजह
ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े विश्लेषकों का मानना है कि Tesla के इस फैसले के पीछे सिर्फ भारतीय टैक्स नीति ही जिम्मेदार नहीं है। पिछले करीब डेढ़ साल में कंपनी की ग्लोबल बिक्री अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में कमजोर हुई है।

इसके अलावा Elon Musk की सार्वजनिक छवि और उनके विवादित बयानों का असर भी कई बाजारों में ब्रांड पर पड़ा है। ऐसे में Tesla फिलहाल नए बड़े निवेश को लेकर सतर्क नजर आ रही है।
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भारतीय ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
Tesla India Factory नहीं आने का सबसे बड़ा असर कीमतों पर पड़ेगा। अगर कंपनी भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग शुरू करती, तो भविष्य में उसकी इलेक्ट्रिक SUV लगभग 30 से 35 लाख रुपये की रेंज में आ सकती थी। इससे भारतीय EV बाजार में प्राइस कम्पटीशन काफी बढ़ सकता था।
लेकिन अब Tesla की कारें इम्पोर्ट होकर ही बिकेंगी, जिसकी वजह से उनकी कीमतें काफी ज्यादा रहेंगी। मौजूदा स्थिति में Tesla भारत में सीमित ग्राहकों तक ही सीमित रहने वाली ब्रांड बनी रहेगी।
घरेलू कंपनियों को फिलहाल राहत
Tesla के लोकल प्रोडक्शन प्लान के खत्म होने से फिलहाल भारतीय कंपनियों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। अभी Tata Motors और Mahindra जैसे ब्रांड 15 लाख से 30 लाख रुपये के बीच मजबूत EV पोर्टफोलियो के साथ बाजार में मौजूद हैं। वहीं नई कंपनियां भी एंट्री कर रही हैं।
अगर Tesla भारत में सस्ती लोकल EV बनाती, तो इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में मुकाबला काफी तेज हो सकता था। लेकिन फिलहाल घरेलू कंपनियों को अपने प्राइस सेगमेंट में सीधी चुनौती नहीं मिलेगी।
भारत में Tesla का अगला कदम क्या होगा?
Tesla India Factory योजना बंद होने के बावजूद Tesla भारत से पूरी तरह बाहर नहीं जा रही है। कंपनी अपनी इम्पोर्टेड कारों को मौजूदा डीलर नेटवर्क और रिटेल चैनलों के जरिए बेचती रहेगी। हालांकि कम बिक्री, ऊंची कीमत और सीमित Supercharger नेटवर्क इसकी ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं।
आने वाले समय में भारत का EV बाजार तेजी से बढ़ने वाला है, लेकिन फिलहाल Tesla उसमें बड़े वॉल्यूम प्लेयर की भूमिका निभाती नजर नहीं आ रही।
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राज प्रजापति, TrickyKhabar.com के संस्थापक और CEO हैं। वे एक अनुभवी कंटेंट राइटर भी हैं, जो टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एंटरटेनमेंट और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च-बेस्ड, सरल और यूज़र-फ्रेंडली लेख लिखते हैं। राज का मानना है कि खबरें तभी असरदार होती हैं जब वे सटीक, साफ़ और समझने लायक हों। पिछले 3+ वर्षों से वे SEO और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं।