महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के एक छोटे से गांव खैरबोड़ी में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि गोलगप्पे बेचने वाला एक लड़का कभी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का हिस्सा बनेगा। लेकिन 25 वर्षीय Ramdas Hemraj Marbade ने यह कर दिखाया है। स्थानीय गलियों में ठेला लगाकर पानी-पूरी बेचने वाला यह युवक आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के श्रीहरिकोटा केंद्र में तकनीकी भूमिका निभा रहा है।
Also Read: Kerala Youngest Organ Donor: 10 महीने की बच्ची बनी केरल की सबसे कम उम्र की ऑर्गन डोनर
जब जिम्मेदारियां सपनों से बड़ी लगती थीं
Ramdas Hemraj Marbade का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था। पिता सरकारी स्कूल में चपरासी थे और घर की आमदनी सीमित थी। ऐसे में पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने दिन में गोलगप्पे बेचकर घर की मदद की और रात में पढ़ाई के लिए समय निकाला। यह वही दौर था जब ज़्यादातर लोग परिस्थितियों के आगे समझौता कर लेते हैं, लेकिन रामदास ने अपनी दिशा नहीं बदली।
स्कूल की पढ़ाई गणेश हाई स्कूल, गुमधवाड़ा से पूरी करने के बाद उन्होंने 12वीं सी.जी. पटेल कॉलेज से की। कॉलेज की नियमित पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था, इसलिए उन्होंने नासिक के वायसीएम कॉलेज से बी.ए. प्राइवेट तौर पर पूरा किया।
तकनीकी कौशल की अहमियत को समझा
सिर्फ डिग्री से आगे बढ़ना मुश्किल होगा—यह बात रामदास ने जल्दी समझ ली थी। इसी सोच के साथ उन्होंने तिरोड़ा के आईटीआई से पंप ऑपरेटर-कम-मेकैनिक का कोर्स किया। यहां उन्होंने जल शोधन प्रणाली, सेंट्रीफ्यूगल और रेसिप्रोकेटिंग पंप्स के संचालन और औद्योगिक उपकरणों की मरम्मत जैसे व्यावहारिक कौशल सीखे।
यह ट्रेनिंग बाद में उनके करियर की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हुई। छोटे कस्बों में अक्सर स्किल-आधारित शिक्षा को कम आंका जाता है, लेकिन रामदास के लिए यही असली टर्निंग पॉइंट बना।
ISRO तक पहुंचने का मौका कैसे मिला?

2023 में ISRO की ओर से अप्रेंटिस ट्रेनी के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। Ramdas Hemraj Marbade ने बिना देर किए आवेदन किया। 2024 में नागपुर में आयोजित लिखित परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने श्रीहरिकोटा में स्किल टेस्ट भी सफलतापूर्वक क्लियर किया। मई 2025 में उन्हें नियुक्ति पत्र मिला।
अब वे श्रीहरिकोटा स्थित स्पेस सेंटर में पंप ऑपरेटर-कम-मेकैनिक के पद पर कार्यरत हैं। उनकी जिम्मेदारियों में अत्याधुनिक उपकरणों का संचालन और रखरखाव शामिल है—जो किसी भी अंतरिक्ष मिशन की तकनीकी तैयारी का अहम हिस्सा होता है।
Ramdas Hemraj Marbade गांव के लिए मिसाल, युवाओं के लिए संदेश
Ramdas Hemraj Marbade की सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। उनके गांव में अब बच्चों के बीच यह चर्चा आम है कि सीमित संसाधन होने के बावजूद भी बड़े संस्थानों तक पहुंचा जा सकता है। कई स्थानीय लोगों का मानना है कि उनकी कहानी ने युवाओं के बीच तकनीकी शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाई है।
निष्कर्ष
Ramdas Hemraj Marbade की यात्रा हमें यह याद दिलाती है कि सपनों का रास्ता अक्सर सुविधाओं से नहीं, बल्कि लगातार किए गए छोटे-छोटे प्रयासों से बनता है। यह कहानी किसी चमत्कार की नहीं, बल्कि धैर्य, कौशल और सही मौके को पहचानने की है—और शायद यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
Also Read: Rajasthan Gaon Gwala Yojana में गाय चराने पर मिलेगा 10,000 रुपये मानदेय

Abhay Singh TrickyKhabar.com के एक दक्ष और मल्टी-टैलेंटेड कंटेंट राइटर हैं, जो हेल्थ, गैजेट्स, शायरी और सरकारी योजनाओं जैसे विविध विषयों पर लिखते हैं। Abhay का फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि पाठकों को सरल, सटीक और उपयोगी जानकारी मिले — वो भी एक ऐसी भाषा में जो दिल से जुड़े।








