दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी के पद पर तैनात रहीं अधिकारी Padma Jaiswal IAS इन दिनों एक पुराने भ्रष्टाचार मामले को लेकर सुर्खियों में हैं। लगभग दो दशक पुराना मामला अब ऐसे मोड़ पर पहुंचा है जहाँ केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से हटा दिया है।
यह मामला सिर्फ एक अफसर पर कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि प्रशासनिक मामलों में लंबी जांच प्रक्रिया किस तरह वर्षों बाद भी निर्णायक मोड़ तक पहुँच सकती है।
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कौन हैं Padma Jaiswal IAS?
पद्मा जायसवाल 2003 बैच की IAS अधिकारी हैं और AGMUT कैडर से आती हैं। AGMUT कैडर में अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश शामिल होते हैं।

6 अक्टूबर 1975 को जन्मीं पद्मा जायसवाल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत मानी जाती है। उन्होंने अकाउंटेंसी में BCom, मैनेजमेंट में MCom और कंपनी मैनेजमेंट में CS की पढ़ाई की है।
करीब दो दशक लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया। इनमें सचिव, निदेशक, संयुक्त सचिव, रजिस्ट्रार और डिप्टी कमिश्नर जैसे पद शामिल रहे। फरवरी 2026 से वे दिल्ली सरकार के Administrative Reforms Department में Special Secretary के तौर पर कार्यरत थीं।
आखिर क्या है पूरा मामला?
Padma Jaiswal IAS के खिलाफ कार्रवाई की जड़ें 2007-08 के उस दौर से जुड़ी हैं जब वे अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग जिले में डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात थीं।
उसी दौरान स्थानीय लोगों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी कि सरकारी राजस्व के इस्तेमाल में अनियमितताएँ हुईं और पद का दुरुपयोग किया गया। आरोपों में सरकारी धन के गलत इस्तेमाल और प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग जैसी बातें शामिल थीं।
फरवरी 2008 में मामला सामने आने के बाद उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित भी किया गया था। हालांकि बाद में जांच लंबित रहने के दौरान उनकी बहाली कर दी गई।
यहीं से यह मामला लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया में फंस गया।
क्यों चला इतना लंबा अनुशासनात्मक मामला?
भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में किसी IAS अधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया अपनाई जाती है। यही कारण है कि कई मामलों में फैसला आने में वर्षों लग जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने All India Services (Discipline & Appeal) Rules के तहत कार्रवाई शुरू की थी। लेकिन बाद में यह मामला Central Administrative Tribunal (CAT) तक पहुंच गया।
CAT ने पहले तकनीकी आधार पर कार्रवाई को रद्द कर दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया।
इस साल 1 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट के फैसले के बाद गृह मंत्रालय ने आगे की प्रक्रिया पूरी की और सेवा से हटाने की सिफारिश की।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद हुई कार्रवाई
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतिम कार्रवाई राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू की गई। Department of Personnel and Training (DoPT) की सिफारिश पर यह निर्णय लिया गया।
IAS अधिकारियों के मामलों में इस तरह की कार्रवाई सामान्य प्रशासनिक फैसलों से अलग होती है क्योंकि इसमें कई स्तरों पर मंजूरी और कानूनी परीक्षण शामिल रहता है।
यही वजह है कि Padma Jaiswal IAS का मामला अब फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है।
दिल्ली सरकार में क्या थी उनकी भूमिका?

दिल्ली सरकार में Padma Jaiswal IAS प्रशासनिक सुधार विभाग में कार्यरत थीं। यह विभाग सरकारी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने, प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटल सुधारों से जुड़ा माना जाता है।
ऐसे विभाग में कार्यरत अधिकारी पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के आधार पर कार्रवाई होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि अभी तक सरकार की ओर से विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में कार्रवाई की पुष्टि की गई है।
क्या नौकरी जाने के बाद सरकारी सेवा पूरी तरह खत्म हो जाती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी IAS अधिकारी को सेवा से हटाना बेहद गंभीर प्रशासनिक दंड माना जाता है। इससे उनकी मौजूदा सेवा समाप्त हो जाती है, लेकिन हर स्थिति में भविष्य के सभी सरकारी अवसर स्वतः बंद हो जाएँ, ऐसा जरूरी नहीं होता।
हालांकि व्यावहारिक रूप से ऐसी कार्रवाई किसी अधिकारी के सार्वजनिक करियर पर बड़ा असर डालती है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें आरोप पुराने हैं, लेकिन कार्रवाई अब जाकर अंतिम रूप तक पहुँची है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर फिर उठी बहस
Padma Jaiswal IAS का मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि क्या प्रशासनिक और भ्रष्टाचार मामलों की जांच प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।
कई बार वर्षों तक लंबित मामलों से न केवल संस्थागत भरोसे पर असर पड़ता है, बल्कि संबंधित अधिकारियों और सरकारी तंत्र दोनों पर सवाल खड़े होते हैं।
दूसरी तरफ, यह भी सच है कि IAS जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई में कानूनी सावधानी और विस्तृत जांच बेहद जरूरी होती है।
एक लंबा प्रशासनिक सफर और अचानक आया बड़ा मोड़
करीब 20 साल तक विभिन्न प्रशासनिक पदों पर काम करने वाली Padma Jaiswal IAS के करियर का अंत इस तरह होगा, शायद इसकी कल्पना कम ही लोगों ने की होगी।
यह मामला केवल एक अधिकारी की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की जटिलता, जवाबदेही और धीमी लेकिन निर्णायक प्रक्रियाओं की भी तस्वीर पेश करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ऐसे मामलों में जांच और फैसलों की गति को लेकर सरकार कोई व्यापक सुधार करती है या नहीं।
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Abhay Singh TrickyKhabar.com के एक दक्ष और मल्टी-टैलेंटेड कंटेंट राइटर हैं, जो हेल्थ, गैजेट्स, शायरी और सरकारी योजनाओं जैसे विविध विषयों पर लिखते हैं। Abhay का फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि पाठकों को सरल, सटीक और उपयोगी जानकारी मिले — वो भी एक ऐसी भाषा में जो दिल से जुड़े।