India US Trade Deal News: भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। दोनों देश इस समय एक बड़े अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Pact) को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (Assistant USTR) ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक हाई-लेवल अमेरिकी डेलिगेशन 1 से 4 जून 2026 तक चलने वाली बेहद महत्वपूर्ण चर्चा के लिए नई दिल्ली पहुंच चुका है।
इस महा-डील को लेकर भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पहले फेज का 99% काम पूरा हो चुका है और अब सिर्फ छोटी-मोटी तकनीकी औपचारिकताएं यानी “कॉमा और फुल स्टॉप” को ठीक करना ही बाकी रह गया है।
कब तक होंगे दस्तखत और क्या है डेडलाइन?
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, अगले कुछ हफ्तों या महीनों के भीतर इस अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर (Sign) कर दिए जाएंगे।
- 24 जुलाई 2026 की डेडलाइन: दोनों देशों के वार्ताकारों के सामने 24 जुलाई 2026 की एक बेहद महत्वपूर्ण समयसीमा (Deadline) है। इस तारीख को अमेरिका की अस्थायी 10% बेसलाइन टैरिफ विंडो बंद हो रही है। अगर भारत इस तारीख से पहले डील फाइनल कर लेता है, तो वह अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले किसी भी अतिरिक्त जुर्माने या टैक्स से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।
- $500 बिलियन का बड़ा लक्ष्य: यह अंतरिम समझौता दोनों देशों के बीच होने वाले एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का पहला हिस्सा है, जिसका मुख्य लक्ष्य साल 2030 तक दोनों देशों के बीच कुल व्यापार को 500 अरब डॉलर (Strategic Target) तक पहुंचाना है।
India US Trade Deal News: भारत और अमेरिका को क्या मिलेगा?

इस समझौते के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे को बड़ी राहत देने का वादा किया है:
- अमेरिकी टैरिफ में कटौती: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) के बाद, अमेरिका भारत पर लगने वाले पारस्परिक टैरिफ रेट को 25% से घटाकर 18% करने जा रहा है। कुछ खास सामानों के लिए इसे और भी कम किया जा सकता है।
- अमेरिकी सामानों के लिए भारतीय बाजार: भारत ने अमेरिका के औद्योगिक सामानों और कृषि उत्पादों (जैसे बादाम, अखरोट, ताजे फल, सोयाबीन तेल और वाइन/स्पिरिट्स) पर आयात शुल्क (Tariffs) कम करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, भारत ने अपने स्थानीय किसानों की सुरक्षा के लिए डेयरी और संवेदनशील कृषि नियमों में कोई ढील नहीं दी है।
- एनर्जी सेक्टर में बड़ा बदलाव: राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार संतुलन को देखते हुए भारत अब अमेरिका से कच्चे तेल (Crude Oil), नई टेक्नोलॉजी और एयरक्राफ्ट की खरीद को काफी हद तक बढ़ाएगा। इसके साथ ही, भारत रूस से आयात होने वाले कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे कम करेगा।
रास्ते के मुख्य रोड़े क्या हैं?
India US Trade Deal News- इतनी प्रगति के बाद भी कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर बातचीत अभी जारी है:
- Section 301 की जांच: सबसे बड़ा सिरदर्द अमेरिका द्वारा शुरू की गई ‘सेक्शन 301’ की जांच है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन और लेबर प्रैक्टिसेज को लेकर है। भारत इस डील को फाइनल करने से पहले इस जांच से पूरी तरह राहत और टैरिफ सुरक्षा की गारंटी मांग रहा है।
- सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला: इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप के कुछ व्यापक टैरिफ फैसलों को पलटने के बाद दोनों देशों को नए अमेरिकी व्यापार कानूनों के हिसाब से इस संधि के नियमों को दोबारा व्यवस्थित करना पड़ा है।

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