Leopard Attack in Mumbai: मुंबई के उपनगरीय इलाके भायंदर ईस्ट में शुक्रवार तड़के उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेंदुआ घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्र में घुस आया। इस अप्रत्याशित घटना में तीन महिलाओं समेत सात लोग घायल हो गए। घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद वन विभाग की टीम ने तेंदुए को बेहोश कर सुरक्षित पकड़ लिया।
आधी रात से सुबह तक फैला डर
स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेंदुआ आधी रात के आसपास भायंदर ईस्ट की सड़कों पर घूमता देखा गया था। सुबह करीब 7 बजे वह बीपी रोड स्थित पारिजात बिल्डिंग में घुस गया। यह इलाका रेलवे स्टेशन के पास होने के कारण हमेशा व्यस्त रहता है। तेंदुए को देखते ही इमारत में रहने वाले लोग घबरा गए, कई लोगों ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जिससे हालात और बिगड़ गए।
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घर के अंदर घुसकर किया हमला

अराजकता के बीच तेंदुआ पहली मंज़िल पर स्थित एक फ्लैट में खुले दरवाज़े से घुस गया। वहां वह सीधे बेडरूम में पहुंचा, जहां 23 वर्षीय अंजलि टाक सो रही थीं। अचानक हुए हमले में अंजलि गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनकी चीखें सुनकर परिवार के अन्य सदस्य और पड़ोसी मौके पर पहुंचे, लेकिन घबराया हुआ तेंदुआ और आक्रामक हो गया।
इसके बाद उसने अंजलि के परिवार के अन्य सदस्यों और मदद के लिए पहुंचे लोगों पर भी हमला कर दिया। कुल मिलाकर इस घटना में सात लोग घायल हुए।
हिम्मत और समझदारी ने बचाई जान
घायल होने के बावजूद अंजलि ने सूझबूझ दिखाते हुए किसी तरह तेंदुए को बेडरूम में बंद कर दिया और अधिकारियों को सूचना दी। यह फैसला बेहद अहम साबित हुआ, क्योंकि इससे तेंदुआ पूरे बिल्डिंग में फैलने से रुक गया। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी सबसे पहले मौके पर पहुंचे और खिड़की तोड़कर अंजलि को बाहर निकाला। सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।
आठ घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
वन विभाग की टीम सुबह से ही मौके पर डटी रही। पुलिस ने आसपास की सड़कों को बंद कर दिया, हालांकि बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। करीब आठ घंटे तक तेंदुआ उसी कमरे में बंद रहा। आखिरकार ट्रैंक्विलाइज़र गन से उसे बेहोश किया गया और दोपहर बाद सुरक्षित पिंजरे में डाल लिया गया।
तेंदुए को बाद में संजय गांधी नेशनल पार्क के रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया, जहां उसकी मेडिकल जांच और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गई।
इलाके में कैसे पहुंचा तेंदुआ? जांच जारी

भायंदर ईस्ट, संजय गांधी नेशनल पार्क से करीब 10 किलोमीटर दूर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि तेंदुआ इतनी दूर रिहायशी इलाके तक कैसे पहुंचा। प्रशासन अब सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस इलाके में तेंदुआ नहीं देखा था।
निष्कर्ष- Leopard Attack in Mumbai
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि शहरी इलाकों और जंगलों की सीमाएं धुंधली होती जा रही हैं। वन्यजीवों का रिहायशी क्षेत्रों में आना सिर्फ डर का कारण नहीं, बल्कि मानव और जानवर—दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। ज़रूरत है सतर्कता, बेहतर योजना और लोगों में जागरूकता की, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
Disclaimer: यह रिपोर्ट पुलिस, वन विभाग और मीडिया स्रोतों पर आधारित है। जांच जारी है; आधिकारिक अपडेट आने पर जानकारी बदली जा सकती है।
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